Wednesday, September 23, 2015

 
टीवी की स्क्रिप्ट कैसे लिखें ? अगर आप के भीतर ये जिज्ञासा है, तो ये स्क्रिप्ट पढ़ें। 
 
वीओ 1 - ((गुलजार की डॉक्यूमेन्ट्री की शुरुआत की लाइनें.
2807 ZN KALAM YAAD BYTE PKG 3 PM में जैसे है, वैसे...लेकिन थोड़ा लम्बा ले लें))
उसकी कहानी बस इतनी सी है कि वो बच्चे सी खिलाखिलाहट को समेटे सदियों की झल्लाहट को दूर करने की कूवत रखता था।

एम्बियन्स
((2807 ZN KALAM RAW
Sir How Did YOU become so great
हा-हा
years take care of it.))

यूं तो ख़ुदा से उसे शिकवा रखना होता तो कहता कि मैं मामूली मछुआरे का बेटा हूं, और मेरी हैसियत क्या है ? वो वहीं रामेश्वरम की गलियों में कहीं खो गया होता। मगर उसकी ख्वाइशें तो समन्दर सी गहरी थीं, और हौसला आसमान सा ऊंचा।    

((यू ट्यूब से कोई इंसपिरेशन डॉयलॉग जैसे --
'हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा'।))

नाम अबुल पकिर जैनुलआब्दीन कलाम। नाम बड़ा, इंसान बड़ा। लेकिन ख़ूबी देखिये कि कितना साधारण। मानो कोई आम आदमी हो। राह चलता, यूं ही दुआ-सलाम करने वाला कोई नेक बन्दा। 

लेकिन राह चलते-चलते उसने भारत के विज्ञान ख़ासकर मिज़ाइल और स्पेस टेक्नोलॉजी की विकास यात्रा की सड़क खींच डाली। और इस सफ़र में उसने सिर्फ़ विज्ञान को पढ़ा-पढ़ाया और आजमाया ही नहीं, बल्कि विज्ञान के दर्शन को जिया। भरपूर जिया। विज्ञान का वो दर्शन जो इंसान को अगली पीढ़ी तक पहुंचने का शऊर सिखाती है। कलाम बताते गये कि सिर्फ़ तकनीक इंसान को आगे नहीं बढ़ाती है, बल्कि तकनीक के साथ इंसान के बेहतर...और बेहतर बनने का रोडमैप तय करती है। इस अलबेली ख़ुसूसियसत के मद्देनज़र उन्हें देश का प्रथम नागरिक बनने का जो गौरव मिला, उसे सच मायने में साकार कर दिया। people's president, कोई जुमला नहीं, किसी पीआर एजेंसी की करामात नहीं, वो वाकई देश के आख़िरी आदमी तक के लिये प्रथम आदमी था। वो यूं क्रांतिवीर था। तवारीख़ जिन्हें अपने बीच पाकर खुशकिस्मत हुआ करती है। 

पैकेज 2 -
वीओ 1 - ((मस्जिद के अजान को लगाएं और फिर बैक टू बैक बिस्मिल्लाह की शहनाई और फिर किसी मन्दिर के घंटे 
की आवाज़ लगाएं))

पूरा हिन्दोस्तान बसता था उसमें। मुसलमान था वो, लेकिन कुरआन के साथ गीता के ज्ञान को ख़ुद को भीतर उतारने 
में उसे कभी हिचक महसूस नहीं हुई। हो भी क्यों, रामेश्वरम के मस्जिद में उसे मजहब की बुनियादी बात पता लगी, 
तो पास के शिव मन्दिर की आरती से उसे मजहबों के मायने पता लगे।

कच्ची उम्र थी, और उस उम्र में अख़बार बेचने से शुरुआत कर ख़ुद को ज़िन्दगी की दुश्वारियों के बीच खड़ा रखने का 
जो माद्दा उसने पैदा किया था, वो जीते जी उससे कोई छीन ना सका। 

1955 के उस दौर में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग कर चुका वो शख़्स ऐश-ओ-आराम की ज़िन्दगी के हर मुक़ाम को पा सकता था। लेकिन हम-आप जैसा आम इंसान जिसे करियर कहता है, उसमें उसने ख़ुद के लिये पहाड़ सी ऊंचाई को पार करने की चुनौती रख ली। वहीं तय हो गया था कि वो क्रांतिवीर बनेगा।  
साइंस और तकनीक की दुनिया का क्रांतिवीर। कुछ बरस पहले ही आज़ादी को आंखों में भर सकने वाले ग़रीब और 
पिछड़े हिन्दोस्तान की तक़दीर को बदलने वाला क्रांतिवीर।

बाइट - नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री
((उसकी लाइफ को सम-अप करने वाला कोई चंक लें, कल की बाइट से))

एमआईटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर चुके कलाम ने सबसे पहले डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट 
ऑर्गनाइजेशन यानी डीआरडीओ की नौकरी की। वहां उन्होंने भारतीय सेना के लिये छोटे हेलिकॉप्टर का डिजाइन तैयार 
किया। इस दौरान वो उस दौर के मशहूर स्पेस साइंटिस्ट विक्रम साराभाई के साथ एक प्रोजेक्ट में जुड़ गये। साराभाई 
जैसे दूरदर्शी वैज्ञानिक ने मानो समझ लिया था कि भारत के अंतरिक्ष विज्ञान को बदलने के लिये जिन कंधों की ज़रूरत थी, वो अब हिन्दोस्तान को मिल चुका है। 

1962 में कलाम को ISRO के साथ जुड़ने का मौका मिला।कलाम को ISRO के पहले सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल 
SLV-III का प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया गया। ये वो दौर था जब ISRO के पास ना संसाधन थे, ना अनुभव, और ऐसे में आगे बढ़ चले दुनिया के मुल्क मानो हम पर हंसी हंसते थे। लेकिन कहते हैं ना कि होनहार ही मौके को पहचानते हैं, और अपने लक्ष्य को पाने के लिये कायनात से लड़ जाते हैं। 1960 के दशक में कोई वैज्ञानिक मवेशियों के तबेले में लैब बनाने और साइकिल पर रॉकेट ढोने का जज्बा रखे, सोच सकते हैं कि वो कितना मज़बूत इरादे रखता रहा होगा।

बाइट - प्रोफेसर सीएनआर राव,

डॉ सी बी देवगन, वैज्ञानिक ((आज अपने यहां 10 बजे के आसपास स्टूडियो डिस्कशन में यही बात बोला है))

वीओ 2 - कलाम को विक्रम साराभाई और सतीश धवन जैसे वैज्ञानिकों ने थुंबा के अंतरिक्ष रिसर्च सेंटर में काम करने के लिए चुना था, जहाँ कलाम ने अंतरिक्ष तक उपग्रह ले जाने वाले देसी रॉकेट विकसित करने वाली टीम की अगुआई की। यही संस्थान 1971 में साराभाई के निधन के बाद, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर बन गया जहाँ कलाम ने अपने वैज्ञानिक जीवन के 22 साल रॉकेट साइंस को भारत के लिए संभव बनाने में लगाए।

((एम्बियन्स)) ((सैटेलाइट लॉन्च के शॉट्स))

1980 में रोहिणी सैटेलाइट के कामयाब लॉन्च के बाद तो कलाम के दिखाये रास्ते पर भारत ने स्पेस क्लब की ऐसी 
बुलन्दी हासिल की, कि अब बड़े-बड़े मुल्कों के सैटेलाइट भारत के ज़रिये अंतरिक्ष में भेजे जाने लगे हैं। क्रांतिवीर कलाम ने भारत के स्पेस प्रोग्राम को एलीट मुल्कों के स्पेस प्रोग्राम से भी ज़्यादा समृद्ध बना डाला।
 
लेकिन इस क्रांतिवीर के सफलता का ये पहला चैप्टर था। वो तो बहता दरिया था, और वो कोई महीन सी बात थी 
जिससे राष्ट्र के निर्माण की उसकी तड़प कुछ और ज़रियों के ज़रिये बाहर आनी थी। 

1982 में कलाम एक बार फिर डीआरडीओ के साथ जुड़े। इस बार इंटीग्रेटेड गाइडेड मिज़ाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के प्रमुख के तौर पर। और तय हो गया कि देश को मिज़ाइल मैन मिलने वाला है।   कलाम ने इस दौर में 5 अलग-अलग तरीके की मिज़ाइलें डेवलप कीं। एंटी टैंक मिज़ाइल नाग, ज़मीन से हवा में मार करने वाले आकाश और त्रिशूल, ज़मीन से ज़मीन भेदने वाली अग्नि और पृथ्वी।

ये मिज़ाइलें भारत की संस्कृति में रचे-बसे तत्वों के नाम पर थीं, तो उनका गुण भी वैसा ही होना था। कलाम अग्नि 
मिज़ाइल से इतने अटैच थे कि उन्होंने उसे अपना बेटा तक कह दिया था। और एक बार कहा था कि आज अब्बू होते 
थे, तो अपने शक्तिशाली पोते अग्नि को देख कर फूले नहीं समाते।   

1990 के दौर से पहले रक्षा मंत्री के सलाहकार और फिर प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार के तौर पर मॉडर्न साइंस एंड टेक्नोलॉजी के लिये उन्होंने जैसे आने वाले दशकों का खाका खींच दिया। 

वैज्ञानिक कलाम का अब सबसे शानदार लम्हा आने वाला था। जब वाजपेयी सरकार पोकरण परमाणु विस्फोट का 
फ़ैसला किया था, तो वो हॉलमार्क था कलाम का जिसकी बदौलत वाजपेयी सरकार इतना बड़ा फ़ैसला कर सकी। 
 
बाइट - अटल ((पोकरण वाली))

वैज्ञानिक कलाम इतनी उपलब्धियां बटोर चुके थे, कि 1997 में उन्हें भारत रत्न का सम्मान नवाज़ा गया। 
कलाम का वैज्ञानिक कभी मिटने वाला नहीं था। लेकिन कलाम को तो राष्ट्र निर्माण की अभी कुछ और यात्राएं तय 
करनी थी। किसी और रूप में। किसी और क्रांति के ज़रिये। क्रांतिवीर कलाम को अभी मीलों चलना था।

पैकेज 3 -

पैकेज 3 - 
बाइट - हामिद अन्सारी। 
((2807 ANI VICE PREZ ON KALAM R -
जब वो राष्ट्रपति थे, पब्लिक राष्ट्रपति बने क्योंकि उन्होंने दीवारें हटा दी थीं। राष्ट्रपति भवन बच्चों के लिये खोला था। मकबूलियत बन गई थी।))

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी साहब एकदम दुरुस्त कह रहे हैं। कलाम के राष्ट्रपति होने का मतलब यही था कि उन्होंने वो सारी दीवारें हटा दी थीं, जो एक राष्ट्रपति के ओहदे पर पहुंचे शख्स को लोगों से दूर करती है। 2002 में कलाम को वाजपेयी सरकार के दौरान राष्ट्रपति चुना गया था। कहते हैं, कि गुजरात दंगों के बाद हीलिंग टच के लिये वाजपेयी सरकार ने मुस्लिम कलाम का नाम राष्ट्रपति पद के लिये आगे बढ़ाया था। लेकिन कलाम सिर्फ़ रबरस्टैम्प राष्ट्रपति नहीं होने जा रहे थे। वाजपेयी सरकार के ना चाहते हुये भी वो दंगा पीड़ित गुजरात गये थे। लेकिन बतौर राष्ट्रपति ना तो वाजपेयी सरकार और ना फिर बाद की मनमोहन सरकार के लिये वो किसी अंड़गे के तौर पर देखे गये। हां, फ़ैसले वही किये जो उनके पद की गरिमा के मुताबिक था।

2006 में उन्होंने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट बिल को संसद को वापस लौटा दिया था। माना जा रहा था कि ये बिल सोनिया गांधी की संसद सदस्यता को बचाने के लिये लाया गया था। उन्होंने बिल पर तभी दस्तख़त किये जब ये ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के ज़रिये होकर गुजरा और सोनिया ने इस्तीफ़ा देकर दोबारा जनादेश हासिल किया। हालांकि 2005 में बिहार में राष्ट्रपति शासन के फ़ैसले पर दस्तख़त करने को उन्होंने अपनी भूल माना था। और कहा जाता है कि इस भूल पर वो इस्तीफ़ा तक दे देना चाहते थे। 

लेकिन राष्ट्रपति के तौर पर इन उतार-चढ़ावों के बीच वो पहले राष्ट्रपति बने जिसने सुखोई उड़ाने का साहस दिखाया।नेवी के सबमरीन में जाने की कूवत रखी, और सेनाओं के सुप्रीम कमांडर के तौर पर सियाचिन में जवानों के बीच पहुंचने का माद्दा रखा।    

2807 KALAM CHILL R -
इस सबके बीच देश ने युवाओं के चहेते राष्ट्रपति की झलक देखी। छात्रों के आइडियल प्रेसिडेंट सर होने की सौगन्ध निभायी।
एम्बियन्स - ((जो छात्रों के बीच बातचीत कर रहा है))

कलाम देश के युवाओं के सामने विजन 2020 का लक्ष्य पहले ही रख चुके थे। India 2020 - A Vision for the New Millennium, Wings of Fire, My journey और Ignited Minds - Unleashing the power within India जैसी किताबों के ज़रिये उन्होंने भारत की युवा पीढ़ी को क्रांति का सपना दिखाया था। 

बाइट - देवेन्द्र फणडवीस
((2807 ANI MAHA CM ON KALAM R))
((21वीं सदी 2020 का विजन पहले उन्होंने ही देखा था। ... विकास की ऊर्जा का संचार किया था))

बाइट - ((2807 ZN KALAM RAW
सर आपने हमें 2020 का विजन दिया, हम स्टूडेंट्स का रोल क्या हो
रूरल और अर्बन डिवाइड ना हो................ पूरी बाइट ))

बाइट - ((2807 ANI AHD SCIENTIST ON KALAM R -
बच्चों को साइंस की प्रेरणा दी, ....))

क्रांतिवीर कलाम अगली पीढ़ी को Ignited Mind बनाने का बीड़ा सफ़लतापूर्वक निभाता चला जा रहा था। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा भी था कि अब मुझे प्रोफेसर कलाम कहो। और शायद इसीलिये उसकी ज़िन्दगी का आख़िरी लम्हा...शिलॉन्ग में...स्टूडेंट्स के बीच उसकी आत्मा की पवित्रता का मानो सम्मान करके गया है।

लेकिन कलाम सिर्फ वैज्ञानिक, राष्ट्रपति और युवाओं के प्रेरणास्रोत जैसे सम्बोधनों में नहीं सिमटते। वो सच मायने में मनुष्य की आध्यात्मिक यात्रा के प्रतिबिम्ब थे। उनकी किताब ट्रैन्सेन्ड- माय स्पिरिचुअल एक्सपीयरिंग के लोकार्पण पर आडवाणी ने सच ही कहा था।

बाइट - आडवाणी -
((0307 ZN KALAM BOOK LAUNCH R -
सुना था कि विद्यार्थी के ज्ञानकोष...
....लेखक ने राष्ट्र की सेवा की है।))

((ट्रांजीशन शॉट्स))
क्रांतिवीर कलाम तुम्हारी ज़िन्दगी के हर आयाम को सलाम है।

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