Saturday, November 9, 2024

बंटेंगे तो कटेंगे और एक हैं तो सेफ हैं सिर्फ महाराष्ट्र, झारखंड इलेक्शन ...

Thursday, November 7, 2024

टॉयलेट टैक्स के बाद CM के समोसे चट, CM के समोसे खाना 'सरकार विरोधी' घोषि...

सिर्फ कवर पर संविधान, भीतर राहुल का 'कोरा' एजेंडा ?

'संविधान सम्मान' में कांग्रेस का 'संविधान घोटाला' ?

पकड़ी गई 'कोरी किताब' तो मांग रहे मनुस्मृति पर जवाब ?

राहुल से 'अर्बन नक्सल' ने बंटवा दी 'कोरी किताब' ?

मोदी के खिलाफ संविधान पर सिर्फ 'फुल मार्केटिंग' ?


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नमस्कार


संविधान की अहमियत क्या हो सकती है,

इसे दुष्यंत कुमार की कलम ने कुछ यूं बयान किया है -


' सामान कुछ नहीं है फटे-हाल है मगर

झोले में उस के पास कोई संविधान है '


लेकिन इन दिनों देश के संविधान को बचाने की लड़ाई लड़ने का दावा कर रहे राहुल गांधी संविधान घोटाले के आरोपों के घेरे में आ गए हैं।


अब आप पूछेंगे कि ये संविधान घोटाला क्या है ?


बुधवार को राहुल गांधी ने नागपुर में संविधान सम्मान सम्मेलन किया है।


इस सम्मेलन में भी राहुल गांधी ने अपने signature style में लाल कवर वाली संविधान की किताब लहरायी।


लेकिन सामने ऑडियंस में जो कांग्रेस के कार्यकर्ता बैठे थे उनके हाथ में जो लाल कवर वाली किताब थी...आरोप लग रहे हैं कि सिर्फ उसके कवर पर संविधान लिखा था...अंदर कोरे पन्ने थे।


BJP के आरोपों के जवाब में कांग्रेस ये तो कह रही है कि 

  

' संविधान का विरोध RSS ने किया 

क्योंकि ये मनुस्मृति से प्रेरित नहीं है '


' संविधान को नॉन-बायोलॉजिकल

पीएम बदलना चाहते हैं '


लेकिन कांग्रेस ने इन आरोपों का खंडन नहीं किया है कि राहुल के इवेंट में लोगों को संविधान की कॉपी बांटी गई या ऐसी कोरी किताब बांटी गई जिसके सिर्फ कवर पर संविधान था ?

 

BJP ने इस कंट्रोवर्सी में ये आरोप भी लगाया है कि राहुल गांधी अर्बन नक्सलियों से घिरे रहते हैं...।


संसद में रखे एक जवाब को दिखाकर कांग्रेस ये तो बता रही है कि भारत सरकार भी अर्बन नक्सल शब्द का इस्तेमाल नहीं करती, लेकिन कांग्रेस ये नहीं बता रही कि संविधान के नाम पर कोरी किताब बांटने की कंट्रोवर्सी का जिम्मेदार कौन है ?


सवाल पब्लिक का है कि क्या नरेंद्र मोदी के खिलाफ संविधान बचाने का एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ अच्छी Photo Opportunity ही मकसद था ?


कांग्रेस ये भी कह रही है कि राहुल गांधी संविधान की जो लाल किताब लेकर घूमते हैं उसकी प्रस्तावना मोदी सरकार में अटॉर्नी जनरल रहे के के वेणुगोपाल ने लिखी है।


लेकिन कांग्रेस ये कभी नहीं बताती कि उसने ही इमरजेंसी में संविधान की प्रस्तावना ही बदल दी थी।


आज राहुल जब संविधान को बचाने का दावा जब कर रहे हैं तब कई ऐसे मसले हैं जिस पर खुद राहुल घिर रहे हैं। मैं उनकी चर्चा आगे करूंगी।


लेकिन क्या राहुल के संविधान बचाओ मिशन में सिर्फ कवर पर संविधान है, भीतर राहुल का 'कोरा' एजेंडा है ?


सवाल पब्लिक का आज यही है।

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ANCHOR 1


राहुल गांधी नागपुर के जिस संविधान सम्मान सम्मेलन में पहुंचे वहां के मंच की डिजाइन भी संविधान का विजुअल इफेक्ट दे रही थी।


राहुल गांधी जब इस सम्मेलन में अपनी स्पीच देने के लिए उठे...तो कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया...


संविधान के सम्मान में, राहुल जी मैदान में...।


UPSOUND

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ANCHOR 2


संविधान के सम्मान में अगर राहुल जी मैदान में हैं तो फिर कांग्रेस खुद पर लग रहे आरोपों पर इधर-उधर का जवाब देने की बजाय...ये क्यों नहीं कहती कि संविधान की प्रतियां ही राहुल के इवेंट में बांटी गई ?


या अगर संविधान की कॉपी नहीं बांटी गई तो इसे सीधे-सीधे तौर पर कहने का साहस क्यों नहीं ?


संविधान का सम्मान जुबानी जमा खर्च से नहीं होता, उसकी भावना का पालन करना होता है।


क्या ये सच नहीं कि राहुल गांधी ने लोकसभा का नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला का ये कहकर अपमान किया कि वो नरेंद्र मोदी के सामने झुकते हैं। जबकि चेयर पर बैठे व्यक्ति को संविधान ने ताकत दी है।


ओम बिड़ला के बार-बार मना करने के बावजूद राहुल गांधी ने संसद में तस्वीरें लहरायीं जबकि ये संसद के नियमों का उल्लंघन था। क्या ये संविधान का सम्मान करना था ?


ये राहुल गांधी ही थे जिन्होंने राफेल मामले में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है कि चौकीदार चोर है, बाद में उसके लिए अदालत से माफी मांगी।

 

ये राहुल गांधी ही थे जिन्होंने मनमोहन कैबिनेट से पास अध्यादेश को फाड़ देने की बात की थी। 


लेकिन राहुल गांधी ने कभी भी जामिया यूनिवर्सिटी और AMU से संविधान से मिले SC/ST आरक्षण को खत्म करने का विरोध नहीं किया।


मैं ये भी याद दिला दूं कि इमरजेंसी में इंदिरा सरकार ने लोकसभा का 5 साल का कार्यकाल दो बार एक-एक साल के लिए बढ़ा लिया था।


क्या ये सब संविधान का सम्मान था ?


उधर जब राहुल नागपुर में संविधान के नाम पर कोरी किताब बांटने के आरोपों में घिरे हैं तो बीजेपी ने ये भी कहा है कि नागपुर के बाद मुंबई पहुंचे राहुल ने वहां संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर को माला ही नहीं पहनायी। 


यानी बीजेपी को राहुल के संविधान वाले नैरेटिव पर पलटवार का जोरदार मौका हाथ लगा है। सुनिए, जवाब में कांग्रेस मीडिया सेल के चेयरमैन पवन खेड़ा क्या कह रहे हैं।


TAKE PAWAN KHERA BITE 


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ANCHOR 3


पवन खेड़ा कह रहे हैं कि बीजेपी के लोग सिर्फ शपथ लेने के संविधान की कॉपी का रंग नहीं देखते, लेकिन संविधान पर अमल नहीं करते।


लेकिन जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस की सरकार पर भारत के संविधान पर अमल नहीं करने का आरोप बीजेपी ने लगाया है।


जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आर्टिकल 370 की बहाली का प्रस्ताव पास हुआ है। इसे लेकर वहां की विधानसभा में जबरदस्त हंगामा हो रहा है। मार-पीट की नौबत आई है।


तो इधर बीजेपी आर्टिकल 370 पर हो रहे हंगामे पर संविधान, संसद और सुप्रीम कोर्ट की दुहाई दे रही है। 


सुनिए, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का ये बयान।


TAKE SMRITI IRANI BITE


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सवाल पब्लिक का


1- संविधान सम्मान के नाम पर नरेंद्र मोदी के खिलाफ क्या राहुल गांधी की मार्केटिंग पकड़ी गई ?


2- क्या संविधान के कवर में कोरी किताब बंटवाने पर कांग्रेस बैकफुट पर है इसीलिए मनुस्मृति को घसीटा गया ?


3- क्या जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आर्टिकल 370 पर कांग्रेस का स्टैंड भारत के संविधान की आत्मा पर प्रहार है ?


4- क्या संविधान बचाओ का राहुल गांधी का नैरेटिव खुद राहुल गांधी की वजह से फुस्स है ?


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Wednesday, November 6, 2024

अबकी बार फिर ट्रंप सरकार, अमेरिका में भी 'मेल्टडाउन' ?

ट्रंप पर अमेरिकी 'न बंटे, न कटे' तो हारा 'इकोसिस्टम' ?

मोदी जैसी ट्रंप की जीत, 'खतरे में संविधान' हुआ फ्लॉप ?

बांग्लादेशी हिंदुओं को ट्रंप कार्ड, कनाडा में क्या होगा ?

मोदी के दोस्त ट्रंप से भारत क्या पाएगा, क्या खोएगा ?

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INTRO

अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी तय हो गई है।

अमेरिकी इतिहास में वो दूसरे ऐसे राष्ट्रपति होंगे जिनका 2 कार्यकाल लगातार नहीं होगा।

लेकिन आज जब ट्रंप की अमेरिका के सत्ता में वापसी तय हो गई तो वहां के कैंपेन और 5 महीने पहले भारत में चुनावी कैंपेन की समानता साफ देखी जा रही है।

आप याद कीजिए -

नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष का सबसे बड़ा कैंपेन क्या था - संविधान खतरे में है।

राहुल गांधी ने तो आज भी नागपुर में 'संविधान सम्मान सम्मेलन' किया है।

संविधान का सम्मान करने में कोई बुराई नहीं लेकिन संविधान खतरे में है ये आरोप कितना सच्चा है, सवाल ये है।

उधर डोनाल्ड ट्रंप के विरोधी भी चुनाव के दौरान यही कहते रहे कि अमेरिकी संविधान और आजादी को उनसे खतरा है।

आज ट्रंप की जीत के बाद लेफ्ट इकोसिस्टम का हिस्सा माने जाने वाले ग्लोबल मीडिया को ये जीत कितनी भारी लग रही है, ये उनके हेडलाइन्स में नजर आ गया।

न्यूयॉर्क टाइम्स के एक कॉलम की हेडलाइन है -

'His win opens an era of uncertainty for the Nation.'

यानी अखबार लिख रहा है कि ट्रंप की जीत राष्ट्र के लिए अनिश्चितता यानी  (uncertainty) का दौर ला रहा है।

वाशिंगटन पोस्ट की हेडलाइन है, ' अमेरिका में लगातार टर्म न पाने वाले दूसरे और पहले felon यानी अपराधी राष्ट्रपति बनेंगे।'

वाशिंगटन पोस्ट एक दूसरी खबर में ये भी लिखता है -

' ट्रंप जीत गए, लेकिन क्या उनका राष्ट्रपति का कार्यकाल उसी तरह अंधकारपूर्ण होगा जैसा उनका प्रचार रहा ? '

BBC ने खबर बनायी है कि -
'एक शक्तिशाली जनादेश ने ट्रंप को खुली छूट दे दी'

जिस व्यक्ति को अमेरिकी जनता ने इतना बड़ा जनादेश दिया है, उसके लिए ऐसे शब्द और ये सोच क्या दिखा रही है ?

क्या आपको नरेंद्र मोदी को मिले जनादेश पर भारत में ऐसे ही सुर सुनने को नहीं मिले थे ?

सवाल पब्लिक का है कि क्या मोदी जैसी ट्रंप को जीत मिली है तो 'खतरे में संविधान' का ग्लोबल एजेंडा फ्लॉप हो गया है ?

ट्रंप, नरेंद्र मोदी के दोस्त हैं। दोनों नेता सार्वजनिक मंच से अपने-अपने तरह से इस बात को कह चुके हैं।

लेकिन ट्रंप के आने से दुनिया में क्या बदलाव आएगा। साथ ही भारत का कौन सा पक्ष मजबूत होगा या चुनौती आएगी ?

इन अहम पहलुओं पर मैं आगे बात करूंगी।

लेकिन आज का मुद्दा है कि क्या ट्रंप पर अमेरिकी 'न बंटे, न कटे' तो 'इकोसिस्टम' हार गया ?

DRY
अबकी बार फिर ट्रंप सरकार, क्या भारत की तरह अमेरिका में भी 'मेल्टडाउन' ?  

सवाल पब्लिक का आज यही है।

TAKE STING
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ANCHOR 1
डोनाल्ड ट्रंप की जीत पक्की हो जाने के बाद उन्हें शुरुआती बधाई देने वाले ग्लोबल लीडर्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा

' आप जब अपने पिछले टर्म की सफलताओं को आगे बढ़ाएंगे तो मैं भारत-अमेरिकी वैश्विक और रणनीतिक साझेदारी की मजबूती की उम्मीद कर रहा हूं। '

ट्रंप को बधाई देने वालों में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं।

लेकिन ट्रंप की जीत के बाद...संविधान खतरे में है कहने वाले कितने सदमे में हैं, भारत में भी इसके संकेत मिलने लगे हैं।

TMC के सांसद साकेत गोखले का बयान है -

' अमेरिकी चुनाव के नतीजे और हमारे लोकसभा के नतीजे साफ दिखा रहे हैं कि भारतीय वोटर ज्यादा समझदार है क्योंकि उसने self-obsessed सत्ताधीशों के अहंकार को तोड़कर उन्हें सबक दिया।

उम्मीद करता हूं कि अमेरिका हमें उपदेश देने से पहले समझेगा कि लोकतंत्र कैसे काम करता है।'

अब आप इस बयान पर क्या कहेंगे ?

साकेत गोखले कहना चाह रहे हैं कि भारत के लोकतंत्र ने मोदी के अहंकार को तोड़ा, फिर आप ही ये भी कहते हैं कि भारत में लोकतंत्र खत्म हो रहा है। संविधान सम्मान का सम्मेलन भी आप ही लोग करते हैं।

इस तरह का मेल्टडाउन अकेले साकेत गोखले का नहीं है।

कांग्रेस के सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने X पर लिखा है -

' *Melania Trump will make golden history.*

*Third* wife,
for the *Second* time,
to become the *First* Lady. '

अब इस बयान पर मैं क्या ही कहूं...सिवाय इसके कि इसे भारत की जनता फूहड़ता मानेगी या नहीं ? ये पब्लिक ही तय करेगी।

उधर ट्रंप की जीत पर DMK नेता टी के एस इलंगोवन का भी नजरिया सुन लीजिए।

TAKE TKS ELAGOVAN BITE
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ANCHOR 2

भारत में आ रही ऐसी प्रतिक्रियाओं के बीच ये भी देखिए कि ...भारत और अमेरिका के चुनावों में सात समंदर की दूरी होने के बावजूद कैसे मोदी और ट्रंप के विरोधियों के सुर मिलते-जुलते थे।

TAKE SPL DVE BITE

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ANCHOR 3

अमेरिका में ट्रंप विरोधी कैंपेन हारा और भारत में मोदी विरोधी।

दोनों नेताओं के तेवर, अंदाज और कई मसलों पर राय भी मिलती जुलती है।

नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को अपना दोस्त बार-बार बताया है।

और हाल में ट्रंप यहां तक कह चुके हैं -

' मोदी बाहर से देखकर ऐसे लगते हैं कि वो आपके पिता हों।'

लेकिन एकदूसरे के लिए व्यक्तिगत सम्मान से बढ़कर मसला ये है कि ट्रंप की नीति से भारत पर क्या असर पड़ेगा ?

मोदी की तरह ट्रंप भी रूस-यूक्रेन युद्ध के खिलाफ नजर आते हैं।

हाल में ट्रंप ने ये भी कहा -

'बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और अल्पसंख्यकों
के खिलाफ हिंसा की मैं निंदा करता हूं'

'ये मेरी निगरानी में कभी नहीं होता'

कमला और जो बाइडेन ने दुनिया भर और
अमेरिका में हिंदुओं की उपेक्षा की है

'हम कट्टरपंथी वामपंथ के धर्म विरोधी एजेंडे
के खिलाफ हिंदू अमेरिकियों की रक्षा करेंगे'

लेकिन क्या FIVE EYES वाले देशों में शामिल कनाडा के खालिस्तान एजेंडे पर ट्रंप रोक लगाएंगे, ये सवाल बड़ा है।

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति भारत के कारोबारियों पर भारी पड़ सकती है।
ऐसे में जब जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल शुरू होगा तो इसमें भारत के नजरिये से क्या होगा, ये देखना दिलचस्प होगा।

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SAWAL

सवाल पब्लिक का

1-  क्या ट्रंप की जीत से 'संविधान खतरे में है' वाली टूलकिट की ग्लोबल हार पक्की हो गई ?

2-  मोदी और ट्रंप के विरोधियों का 'मेल्टडाउन' एक जैसा है, क्या विरोधी हार के बावजूद सबक नहीं सीख रहे ?

3- क्या ट्रंप की जीत से बांग्लादेश और कनाडा के हिंदुओं की आवाज सुनी जाएगी ?

4- क्या ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध रोकेंगे...क्या ग्लोबल मसलों पर भारत के दोस्त बनकर खड़े होंगे ट्रंप ?
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GUEST

रोहन गुप्ता, प्रवक्ता, BJP
तहसीन पूनावाला, राजनीतिक विश्लेषक
विवेक सायलस, प्रवक्ता, SP
विवेक श्रीवास्तव, राजनीतिक विश्लेषक
सौरभ शुक्ला, फाउंडर, न्यूज मोबाइल
हर्षवर्धन त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार