'संविधान सम्मान' में कांग्रेस का 'संविधान घोटाला' ?
पकड़ी गई 'कोरी किताब' तो मांग रहे मनुस्मृति पर जवाब ?
राहुल से 'अर्बन नक्सल' ने बंटवा दी 'कोरी किताब' ?
मोदी के खिलाफ संविधान पर सिर्फ 'फुल मार्केटिंग' ?
________________________________________
नमस्कार
संविधान की अहमियत क्या हो सकती है,
इसे दुष्यंत कुमार की कलम ने कुछ यूं बयान किया है -
' सामान कुछ नहीं है फटे-हाल है मगर
झोले में उस के पास कोई संविधान है '
लेकिन इन दिनों देश के संविधान को बचाने की लड़ाई लड़ने का दावा कर रहे राहुल गांधी संविधान घोटाले के आरोपों के घेरे में आ गए हैं।
अब आप पूछेंगे कि ये संविधान घोटाला क्या है ?
बुधवार को राहुल गांधी ने नागपुर में संविधान सम्मान सम्मेलन किया है।
इस सम्मेलन में भी राहुल गांधी ने अपने signature style में लाल कवर वाली संविधान की किताब लहरायी।
लेकिन सामने ऑडियंस में जो कांग्रेस के कार्यकर्ता बैठे थे उनके हाथ में जो लाल कवर वाली किताब थी...आरोप लग रहे हैं कि सिर्फ उसके कवर पर संविधान लिखा था...अंदर कोरे पन्ने थे।
BJP के आरोपों के जवाब में कांग्रेस ये तो कह रही है कि
' संविधान का विरोध RSS ने किया
क्योंकि ये मनुस्मृति से प्रेरित नहीं है '
' संविधान को नॉन-बायोलॉजिकल
पीएम बदलना चाहते हैं '
लेकिन कांग्रेस ने इन आरोपों का खंडन नहीं किया है कि राहुल के इवेंट में लोगों को संविधान की कॉपी बांटी गई या ऐसी कोरी किताब बांटी गई जिसके सिर्फ कवर पर संविधान था ?
BJP ने इस कंट्रोवर्सी में ये आरोप भी लगाया है कि राहुल गांधी अर्बन नक्सलियों से घिरे रहते हैं...।
संसद में रखे एक जवाब को दिखाकर कांग्रेस ये तो बता रही है कि भारत सरकार भी अर्बन नक्सल शब्द का इस्तेमाल नहीं करती, लेकिन कांग्रेस ये नहीं बता रही कि संविधान के नाम पर कोरी किताब बांटने की कंट्रोवर्सी का जिम्मेदार कौन है ?
सवाल पब्लिक का है कि क्या नरेंद्र मोदी के खिलाफ संविधान बचाने का एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ अच्छी Photo Opportunity ही मकसद था ?
कांग्रेस ये भी कह रही है कि राहुल गांधी संविधान की जो लाल किताब लेकर घूमते हैं उसकी प्रस्तावना मोदी सरकार में अटॉर्नी जनरल रहे के के वेणुगोपाल ने लिखी है।
लेकिन कांग्रेस ये कभी नहीं बताती कि उसने ही इमरजेंसी में संविधान की प्रस्तावना ही बदल दी थी।
आज राहुल जब संविधान को बचाने का दावा जब कर रहे हैं तब कई ऐसे मसले हैं जिस पर खुद राहुल घिर रहे हैं। मैं उनकी चर्चा आगे करूंगी।
लेकिन क्या राहुल के संविधान बचाओ मिशन में सिर्फ कवर पर संविधान है, भीतर राहुल का 'कोरा' एजेंडा है ?
सवाल पब्लिक का आज यही है।
..............
ANCHOR 1
राहुल गांधी नागपुर के जिस संविधान सम्मान सम्मेलन में पहुंचे वहां के मंच की डिजाइन भी संविधान का विजुअल इफेक्ट दे रही थी।
राहुल गांधी जब इस सम्मेलन में अपनी स्पीच देने के लिए उठे...तो कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया...
संविधान के सम्मान में, राहुल जी मैदान में...।
UPSOUND
..........................
ANCHOR 2
संविधान के सम्मान में अगर राहुल जी मैदान में हैं तो फिर कांग्रेस खुद पर लग रहे आरोपों पर इधर-उधर का जवाब देने की बजाय...ये क्यों नहीं कहती कि संविधान की प्रतियां ही राहुल के इवेंट में बांटी गई ?
या अगर संविधान की कॉपी नहीं बांटी गई तो इसे सीधे-सीधे तौर पर कहने का साहस क्यों नहीं ?
संविधान का सम्मान जुबानी जमा खर्च से नहीं होता, उसकी भावना का पालन करना होता है।
क्या ये सच नहीं कि राहुल गांधी ने लोकसभा का नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला का ये कहकर अपमान किया कि वो नरेंद्र मोदी के सामने झुकते हैं। जबकि चेयर पर बैठे व्यक्ति को संविधान ने ताकत दी है।
ओम बिड़ला के बार-बार मना करने के बावजूद राहुल गांधी ने संसद में तस्वीरें लहरायीं जबकि ये संसद के नियमों का उल्लंघन था। क्या ये संविधान का सम्मान करना था ?
ये राहुल गांधी ही थे जिन्होंने राफेल मामले में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है कि चौकीदार चोर है, बाद में उसके लिए अदालत से माफी मांगी।
ये राहुल गांधी ही थे जिन्होंने मनमोहन कैबिनेट से पास अध्यादेश को फाड़ देने की बात की थी।
लेकिन राहुल गांधी ने कभी भी जामिया यूनिवर्सिटी और AMU से संविधान से मिले SC/ST आरक्षण को खत्म करने का विरोध नहीं किया।
मैं ये भी याद दिला दूं कि इमरजेंसी में इंदिरा सरकार ने लोकसभा का 5 साल का कार्यकाल दो बार एक-एक साल के लिए बढ़ा लिया था।
क्या ये सब संविधान का सम्मान था ?
उधर जब राहुल नागपुर में संविधान के नाम पर कोरी किताब बांटने के आरोपों में घिरे हैं तो बीजेपी ने ये भी कहा है कि नागपुर के बाद मुंबई पहुंचे राहुल ने वहां संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर को माला ही नहीं पहनायी।
यानी बीजेपी को राहुल के संविधान वाले नैरेटिव पर पलटवार का जोरदार मौका हाथ लगा है। सुनिए, जवाब में कांग्रेस मीडिया सेल के चेयरमैन पवन खेड़ा क्या कह रहे हैं।
TAKE PAWAN KHERA BITE
..............
ANCHOR 3
पवन खेड़ा कह रहे हैं कि बीजेपी के लोग सिर्फ शपथ लेने के संविधान की कॉपी का रंग नहीं देखते, लेकिन संविधान पर अमल नहीं करते।
लेकिन जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस की सरकार पर भारत के संविधान पर अमल नहीं करने का आरोप बीजेपी ने लगाया है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आर्टिकल 370 की बहाली का प्रस्ताव पास हुआ है। इसे लेकर वहां की विधानसभा में जबरदस्त हंगामा हो रहा है। मार-पीट की नौबत आई है।
तो इधर बीजेपी आर्टिकल 370 पर हो रहे हंगामे पर संविधान, संसद और सुप्रीम कोर्ट की दुहाई दे रही है।
सुनिए, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का ये बयान।
TAKE SMRITI IRANI BITE
....................
सवाल पब्लिक का
1- संविधान सम्मान के नाम पर नरेंद्र मोदी के खिलाफ क्या राहुल गांधी की मार्केटिंग पकड़ी गई ?
2- क्या संविधान के कवर में कोरी किताब बंटवाने पर कांग्रेस बैकफुट पर है इसीलिए मनुस्मृति को घसीटा गया ?
3- क्या जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आर्टिकल 370 पर कांग्रेस का स्टैंड भारत के संविधान की आत्मा पर प्रहार है ?
4- क्या संविधान बचाओ का राहुल गांधी का नैरेटिव खुद राहुल गांधी की वजह से फुस्स है ?
..................
No comments:
Post a Comment