ट्रंप पर अमेरिकी 'न बंटे, न कटे' तो हारा 'इकोसिस्टम' ?
मोदी जैसी ट्रंप की जीत, 'खतरे में संविधान' हुआ फ्लॉप ?
बांग्लादेशी हिंदुओं को ट्रंप कार्ड, कनाडा में क्या होगा ?
मोदी के दोस्त ट्रंप से भारत क्या पाएगा, क्या खोएगा ?
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INTRO
अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी तय हो गई है।
अमेरिकी इतिहास में वो दूसरे ऐसे राष्ट्रपति होंगे जिनका 2 कार्यकाल लगातार नहीं होगा।
लेकिन आज जब ट्रंप की अमेरिका के सत्ता में वापसी तय हो गई तो वहां के कैंपेन और 5 महीने पहले भारत में चुनावी कैंपेन की समानता साफ देखी जा रही है।
आप याद कीजिए -
नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष का सबसे बड़ा कैंपेन क्या था - संविधान खतरे में है।
राहुल गांधी ने तो आज भी नागपुर में 'संविधान सम्मान सम्मेलन' किया है।
संविधान का सम्मान करने में कोई बुराई नहीं लेकिन संविधान खतरे में है ये आरोप कितना सच्चा है, सवाल ये है।
उधर डोनाल्ड ट्रंप के विरोधी भी चुनाव के दौरान यही कहते रहे कि अमेरिकी संविधान और आजादी को उनसे खतरा है।
आज ट्रंप की जीत के बाद लेफ्ट इकोसिस्टम का हिस्सा माने जाने वाले ग्लोबल मीडिया को ये जीत कितनी भारी लग रही है, ये उनके हेडलाइन्स में नजर आ गया।
न्यूयॉर्क टाइम्स के एक कॉलम की हेडलाइन है -
'His win opens an era of uncertainty for the Nation.'
यानी अखबार लिख रहा है कि ट्रंप की जीत राष्ट्र के लिए अनिश्चितता यानी (uncertainty) का दौर ला रहा है।
वाशिंगटन पोस्ट की हेडलाइन है, ' अमेरिका में लगातार टर्म न पाने वाले दूसरे और पहले felon यानी अपराधी राष्ट्रपति बनेंगे।'
वाशिंगटन पोस्ट एक दूसरी खबर में ये भी लिखता है -
' ट्रंप जीत गए, लेकिन क्या उनका राष्ट्रपति का कार्यकाल उसी तरह अंधकारपूर्ण होगा जैसा उनका प्रचार रहा ? '
BBC ने खबर बनायी है कि -
'एक शक्तिशाली जनादेश ने ट्रंप को खुली छूट दे दी'
जिस व्यक्ति को अमेरिकी जनता ने इतना बड़ा जनादेश दिया है, उसके लिए ऐसे शब्द और ये सोच क्या दिखा रही है ?
क्या आपको नरेंद्र मोदी को मिले जनादेश पर भारत में ऐसे ही सुर सुनने को नहीं मिले थे ?
सवाल पब्लिक का है कि क्या मोदी जैसी ट्रंप को जीत मिली है तो 'खतरे में संविधान' का ग्लोबल एजेंडा फ्लॉप हो गया है ?
ट्रंप, नरेंद्र मोदी के दोस्त हैं। दोनों नेता सार्वजनिक मंच से अपने-अपने तरह से इस बात को कह चुके हैं।
लेकिन ट्रंप के आने से दुनिया में क्या बदलाव आएगा। साथ ही भारत का कौन सा पक्ष मजबूत होगा या चुनौती आएगी ?
इन अहम पहलुओं पर मैं आगे बात करूंगी।
लेकिन आज का मुद्दा है कि क्या ट्रंप पर अमेरिकी 'न बंटे, न कटे' तो 'इकोसिस्टम' हार गया ?
DRY
अबकी बार फिर ट्रंप सरकार, क्या भारत की तरह अमेरिका में भी 'मेल्टडाउन' ?
सवाल पब्लिक का आज यही है।
TAKE STING
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ANCHOR 1
डोनाल्ड ट्रंप की जीत पक्की हो जाने के बाद उन्हें शुरुआती बधाई देने वाले ग्लोबल लीडर्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा
' आप जब अपने पिछले टर्म की सफलताओं को आगे बढ़ाएंगे तो मैं भारत-अमेरिकी वैश्विक और रणनीतिक साझेदारी की मजबूती की उम्मीद कर रहा हूं। '
ट्रंप को बधाई देने वालों में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं।
लेकिन ट्रंप की जीत के बाद...संविधान खतरे में है कहने वाले कितने सदमे में हैं, भारत में भी इसके संकेत मिलने लगे हैं।
TMC के सांसद साकेत गोखले का बयान है -
' अमेरिकी चुनाव के नतीजे और हमारे लोकसभा के नतीजे साफ दिखा रहे हैं कि भारतीय वोटर ज्यादा समझदार है क्योंकि उसने self-obsessed सत्ताधीशों के अहंकार को तोड़कर उन्हें सबक दिया।
उम्मीद करता हूं कि अमेरिका हमें उपदेश देने से पहले समझेगा कि लोकतंत्र कैसे काम करता है।'
अब आप इस बयान पर क्या कहेंगे ?
साकेत गोखले कहना चाह रहे हैं कि भारत के लोकतंत्र ने मोदी के अहंकार को तोड़ा, फिर आप ही ये भी कहते हैं कि भारत में लोकतंत्र खत्म हो रहा है। संविधान सम्मान का सम्मेलन भी आप ही लोग करते हैं।
इस तरह का मेल्टडाउन अकेले साकेत गोखले का नहीं है।
कांग्रेस के सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने X पर लिखा है -
' *Melania Trump will make golden history.*
*Third* wife,
for the *Second* time,
to become the *First* Lady. '
अब इस बयान पर मैं क्या ही कहूं...सिवाय इसके कि इसे भारत की जनता फूहड़ता मानेगी या नहीं ? ये पब्लिक ही तय करेगी।
उधर ट्रंप की जीत पर DMK नेता टी के एस इलंगोवन का भी नजरिया सुन लीजिए।
TAKE TKS ELAGOVAN BITE
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ANCHOR 2
भारत में आ रही ऐसी प्रतिक्रियाओं के बीच ये भी देखिए कि ...भारत और अमेरिका के चुनावों में सात समंदर की दूरी होने के बावजूद कैसे मोदी और ट्रंप के विरोधियों के सुर मिलते-जुलते थे।
TAKE SPL DVE BITE
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ANCHOR 3
अमेरिका में ट्रंप विरोधी कैंपेन हारा और भारत में मोदी विरोधी।
दोनों नेताओं के तेवर, अंदाज और कई मसलों पर राय भी मिलती जुलती है।
नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को अपना दोस्त बार-बार बताया है।
और हाल में ट्रंप यहां तक कह चुके हैं -
' मोदी बाहर से देखकर ऐसे लगते हैं कि वो आपके पिता हों।'
लेकिन एकदूसरे के लिए व्यक्तिगत सम्मान से बढ़कर मसला ये है कि ट्रंप की नीति से भारत पर क्या असर पड़ेगा ?
मोदी की तरह ट्रंप भी रूस-यूक्रेन युद्ध के खिलाफ नजर आते हैं।
हाल में ट्रंप ने ये भी कहा -
'बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और अल्पसंख्यकों
के खिलाफ हिंसा की मैं निंदा करता हूं'
'ये मेरी निगरानी में कभी नहीं होता'
कमला और जो बाइडेन ने दुनिया भर और
अमेरिका में हिंदुओं की उपेक्षा की है
'हम कट्टरपंथी वामपंथ के धर्म विरोधी एजेंडे
के खिलाफ हिंदू अमेरिकियों की रक्षा करेंगे'
लेकिन क्या FIVE EYES वाले देशों में शामिल कनाडा के खालिस्तान एजेंडे पर ट्रंप रोक लगाएंगे, ये सवाल बड़ा है।
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति भारत के कारोबारियों पर भारी पड़ सकती है।
ऐसे में जब जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल शुरू होगा तो इसमें भारत के नजरिये से क्या होगा, ये देखना दिलचस्प होगा।
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SAWAL
सवाल पब्लिक का
1- क्या ट्रंप की जीत से 'संविधान खतरे में है' वाली टूलकिट की ग्लोबल हार पक्की हो गई ?
2- मोदी और ट्रंप के विरोधियों का 'मेल्टडाउन' एक जैसा है, क्या विरोधी हार के बावजूद सबक नहीं सीख रहे ?
3- क्या ट्रंप की जीत से बांग्लादेश और कनाडा के हिंदुओं की आवाज सुनी जाएगी ?
4- क्या ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध रोकेंगे...क्या ग्लोबल मसलों पर भारत के दोस्त बनकर खड़े होंगे ट्रंप ?
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GUEST
रोहन गुप्ता, प्रवक्ता, BJP
तहसीन पूनावाला, राजनीतिक विश्लेषक
विवेक सायलस, प्रवक्ता, SP
विवेक श्रीवास्तव, राजनीतिक विश्लेषक
सौरभ शुक्ला, फाउंडर, न्यूज मोबाइल
हर्षवर्धन त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार
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